पहाड़ों की रानी : मसूरी
देहरादून से शुरू होते सर्प-नुमा रास्ते आधे घंटे में मुझे मसूरी पहुंचा देते हैं , मानो जैसे स्लो पॉइजन , सर्र-सर्र करती हवाएं धीरे धीरे नसों में घुसती और कितने ही मनोरम आलोकों से गुजरते , मुझे इस लोक में ला छोड़ती हैं। जैसे मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जा सकता है , शिमला-मसूरी को हनीमून कैपिटल भी कह सकते हैं। अगर इस अर्थव्यवस्था में भी हनीमून पर जाने का अवसर प्राप्त हो तो मैं मसूरी ही जाना चाहूंगा। मेरे अनुभव के ब्रीफकेस में ना कोई चुनाव जीतने वाला बजट है , ना ही किसी फ़क़ीर की कोई झोली , ना ही यह सील्ड ब्रीफकेस है। मेरे इस मिडिल क्लास अनुभव के ब्रीफकेस में बहुत से वर्ग हैं , एक है पका हुआ खाना , रोज़ नहाना , काम पर जाना और लौट के घर आना। पर इस अनुभव से अलग जो भी है वो है एक यात्री का अनुभव। तभी इस यात्रा के बारे में आपको अवगत करा रहा हूँ। शीर्षक सिर्फ आपको भ्रमित करने के लिए नहीं रखा है , मैं मसूरी की ही बात करूंगा। स्कूल में ऐसे निबंध नही लिख पाया तो आज शीर्षक के माध्यम से दोषमुक्त हो रहा हूँ। ...