आत्म-निर्भर डिमांड-सप्लाई
भारतीय अर्थव्यवस्था पर अगर आज कोई सिनेमा बने तो उसके शुरुआत में यह ज़रूर लिखा जायेगा की यह सच्ची घटनाओं पर आधारित नहीं है| इस बात का प्रमाण फिल्म देख कर नहीं, बल्कि इस तथ्य से पता चलेगा की भारत की आधी से ज्यादा आबादी इस फिल्म को नहीं देख पायेगी, पर फिर भी यह करोड़ों रूपये का कारोबार करेगी| यह भी कहा जायेगा की इसकी डिमांड जबरदस्त है| विश्लेषक बताएँगे की किन किन किरदारों ने अच्छा अभिनय किया, और क्यों ये और बेहतर हो सकती थी| मिला जुला कर जब यह फ़िल्मी मेला समाप्त होगा तो इंडिया डिमांड सप्लाई के अनोखे रिश्ते से विकास की और अग्रसर दिखेगा| जब तक अर्थव्यवस्था सच्ची घटनाओं पर आधारित नहीं होती है तब तक आर्थिक विकास नहीं होता, आर्थिक वृद्धि ज़रूर हो सकती है| दुर्भाग्य से भारत की वर्तमान राजनीती वृद्धि और विकास, दोनों को विकास बता कर अर्थव्यस्था को सच्ची घटनाओं से और भी दूर ले जा रही है| हमारी अर्थव्यस्था सच्ची घटनाओं और बनावटी आधारों की दूरी को कम नहीं करती, बल्कि दोनों को अलग अलग समस्या बता कर जिम्मेदारियां बाँट लेती है| एक मिश्रित ढांचा जिसमे वृद्धि निजी एजेंटों के जिम्मे जाता ह...