योग शास्त्र में विभिन्न प्रकार के प्रणाम

योग तन, मन और जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उपयोग में लायी जाने वाली प्राचीन प्रणाली है| आईये जानते है योग में मौजूद विभिन्न प्रकार के प्रणाम के बारे में| बेहतर जानकारी के लिए तस्वीर को भी ध्यान से देखे, और फिर देखकर ध्यान करें|

 

गोलकुंडा प्रणाम


 इसे करते समय व्यक्ति कुंडे की तरह गोल हो जाता है, पर इस प्रणाम के नाम के पीछे और कहानी है| गोलकुंडा के हीरे के खदान, जिसने कोहिनूर जैसे बहुमूल्य हीरे दिए, उसे स्मरण कर इस प्रणाम को किया जाता है| इसे संसद के सीढियों पे इसलिए किया जाता है क्योंकि संसद ने भी देश को कई अनोखे हीरे दिए हैं|

गोलकुंडा प्रणाम करते समय शरीर को गोल कर अपने माथे को किसी ठोष जगह पर टिका दें और कोशिश करे की आप भी वहीँ टिके रहे| इसका अभ्यास करने से अनेको फायदे होते है जैस आप समर्पण की भावना से ओत-प्रोत हो जाते हो, आप जमीन से जुड़ जाते हो और जमीन आपसे, आप न बुरा देख सकते हो न बोल सकते हो| इसके रासायनिक गुण अगर आपके निजी गुणों से मिल जाते हैं तो आपमें अनोखी आस्था भी जाग सकती हैं पर इसके लिए जरुरी यह है की इसे आप 5 साल में एक बार ही करें|


दीर्घडंडा प्रणाम


दीर्घडंडा प्रणाम ऊँचे स्तर की योग प्रणाली है, इसे सीढियों पे नहीं किया जा सकता, इसके लिए जमीन समतल करनी  पड़ती  है, अगर आप जमीन न खाली करवा पाए तो मुकदमा लड़ कर करवा लें|  

इससे समर्पण की भावना और तीव्र हो जाती है, आप न तो बुरा देख सकते हो, न बोल सकते और न सुन सकते हो| यह कहीं भी किया जा सकता है, क्योंकि यह गोलकुंडा के हीरे जैसा बहुमूल्य नहीं है, यह अमूल्य है| जैसा की आप देख सकते है यह पूर्ण समर्थन है, हर प्रकार के निजी गौरव का त्याग है, और पद की गरिमा का भी बहिष्कार है| इसमें आपमें लम्बे डंडे सा आत्म-सम्मान आ जाता है, और आप उसके हो जाते हो, जो आपको सबसे अधिक भांज सकता है| गौर करें की इससे आपके सर के बाल भी वापिस आ सकते हैं, और भी बहुत कुछ ढका जा सकता है, जो गोलकुंडा प्रणाम में मुश्किल है|


आम आदमी का प्रणाम


दीर्घडंडा प्रणाम आम आदमी के लिए भी डंडे का सहारा बन सकता है| इसी कारण यह अमूल्य भी है| योग को जन जन तक पहुचाने में दीर्घडंडा प्रणाम का बहुत लम्बा योगदान है|

आम आदमी गोलकुंडा प्रणाम नहीं कर सकता क्योंकि यह ख़ास जगहों पर किया जाता है, जैसे की सीढियों पर (जब तक की उसे समतल न किया गया हो) , हीरे के खदानों का स्मरण करते हुए, समर्पण की भावना से, 5 साल में एक बार|


गोलकुंडा और दीर्घडंडा का योग

गोलकुंडा और दीर्घडंडा प्रणाम आपस में मिल सकते है या नहीं, यह एक संवैधानिक जिरह है, और इसका योग से कोई लेना देना नहीं, एक व्यक्ति हर प्रकार के योग कर सकता है, इसीलिए आज यह बहुत चर्चित प्रणाली है| इन्हें विभाजित करने वाले लोग इनके गुणों से अपरिचित थे, उनके तन, मन और जीवन में इनके रासायनिक तत्त्व आस्था नहीं जगा पाए थे, क्योंकि भारतीय योग प्रणाली से इनका जुड़ाव कम था|

 


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