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Showing posts from August, 2022

आज़ादी

... और तब साइमन मकाबिअस ,  जो की न्याय करता है ,  उस बद्धु बच्चे से पूछता है ,  तुम क्यों बार बार भागे जाते हो ?  लड़के ने जवाब दिया , अपने घर जाने को ”  चमरेवाला जो की उस बच्चे का मालिक था , उसने जवाब-तलब करते हुए कहा ,  “ जरा मैं भी तो सुनु इसका घर कहाँ है , मकाबी का यह स्वर्गिक देश , जहाँ पहाड़ी खेतो का सिलसिला कहीं टुटा हुआ न हो , एक सतह से दूसरी सतह , खेत पर खेत चढ़ते चले जाते हैं , और उनकी फसल इतनी हरी-भरी और ऐसी गह्गाहाकर होती है , की देखकर ख़ुशी होती है , और यह बद्धु घर जाना चाहता है , रेगिस्तान की गर्म , फिसलती हुई बालू पर खरे हुए एक गंदे चिकट खाल से बने तम्बू में , जहाँ से मैंने इसे ख़रीदा था! ” साइमन मकाबिअस ने फिर बच्चे से पूछा , तुम क्यों गर्म रेत में दुबारा जाना चाहते हो , इस स्वर्गिक देश को छोड़कर ? लड़के ने सुबकते हुए जवाब दिया , “ आज़ाद होने के लिए मकाबी , आजाद होने के लिए...

धार्मिक इतिहास और मैं

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              धार्मिक इतिहास और मैं (मार्क्ड ईन येलो)   सुंदरकांड में एक प्रसंग है जिसका जिक्र उंदर काण्ड में नहीं है   सुंदर काण्ड में पूछा  जाता है “ मैं न होता , तो क्या होता ?” उंदर कांड का सवाल है की मैं होता तो भी क्या घंटा फरक पड़ता ? “ अशोक वाटिका" में   जिस समय रावण क्रोध में भरकर , तलवार लेकर , सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा , तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर , इसका सर काट लेना चाहिये। यह सुन्दर काण्ड का दृश्य है उंदर काण्ड तक मैं तलवार चलाना नहीं जानता था| किन्तु , अगले ही क्षण , उन्हों ने देखा "मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे , यदि मैं आगे बड़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि यदि मै न होता , तो सीता जी को कौन बचाता ? शायर पप्पू प्रतापगढ़ी कह गए की बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है , मैं न होता , तो क्या होता ? परन्तु ये क्या हुआ ? उंदर काण्ड में ऐसे दृश्य नहीं होते, ऐसे भ्रम जरुर पाए जाते हैं| सीताजी को बचाने का कार्...